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सेना ने पीएम को कहां से दिए 100 करोड़
आरटीआई से भी नहीं मिला जवाब, सैन्य कर्मियों के वेतन में नहीं हुई कटौती
अरुणेश पठानिया – Amar Ujala
देहरादून। सेना दिवस पर प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए सेना ने 100 करोड़ रुपये का चैक दिया। लेकिन ये पैसे कहां से आए यह करीब दो माह बाद भी स्पष्ट नहीं हुआ। बताया गया था कि राहत कोष में जवानों और अधिकारियों के वेतन से पैसे दिए गए हैं। जबकि आरटीआई में खुलासा हुआ कि वेतन में कटौती ही नहीं हुई है। ऐसे में जब वेतन से कटौती ही नहीं हुई तो 100 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री को कहां से सौंपे गए।
प्रधानमंत्री राहत कोष में थलसेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने 15 जनवरी (सेना दिवस) 2015 पर 100 करोड़ का चैक दिया था। राहत राशि सेना के जवानों और अधिकारियों के एक दिन के वेतन से एकत्रित कर जमा करवाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे चैक के लिए सैन्य कर्मियों के वेतन से हुई कटौती को लेकर सूचना के अधिकार में मांगी जानकारी पर सेना का जवाब मामले को उलझा रहा है। आरटीआई में सेना ने जवाब दिया है कि राहत कोष के लिए कोई धनराशि सैन्य कर्मियों के वेतन से नहीं काटी गई है। साथ ही जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि यह मामलाविचाराधीन है। विशेष बात यह है कि आरटीआई का आवेदन प्रधानमंत्री को चैक सौंपने के 9 दिन बाद सेना मुख्यालय को 24 जनवरी को भेजा गया। आरटीआई में जानकारी मांगी गई थी कि वेतन कटौती केलिए सैन्य कर्मियों की सहमति ली गई। अगर ली गई तो सभी ने रजामंदी दी है। यह भी पूछा गया कि कितने सैन्य कर्मियों ने रजामंदी नहीं दी। सीडीए को वेतन कटौती के लिए भेजी आफिस आर्डर की कापी भी आवेदक ने मांगी। सेना से आरटीआई में जो जवाब भेजा है उसपर तिथि 20 मार्च की अंकित है। आरटीआई में सेना की और से मिली जानकारी से स्पष्ट हो रहा है कि मार्च माह तक किसी सैन्य कर्मी के वेतन से कटौती नहीं हुई। जब वेतन काटने का मामला मार्च में भी विचाराधीन रहा तो सेना ने किस मद से प्रधानमंत्री राहत कोष में 100 करोड़ रुपये दिए।
अब प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी आरटीआईः सेना के आरटीआई जवाब को आवेदक प्रभु डंडरियाल ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। उन्होंने अब प्रधानमंत्री कार्यालय को आरटीआई भेजी है जिसमें 15 जनवरी को आर्मी चीफ के प्रधानमंत्री को सौंपे 100 करोड़ के चैक का हवाला देकर चार बिंदुओ पर जानकार मांगी है।
-आर्मी चीफ के सौंपे चैक को प्रधानमंत्री राहत कोष खाते में डाला गया। किस बैंक में किस तिथि को यह चैक जमा करवाया गया। अगर चैक से राशि निकली तो सेना के किस अकाउंट हेड से डली अगर चैक वापस सेना को लौटाया तो लौटाने के कवरिंग लैटर की कापी
पीआईबी ने जारी की थी खबर
15 जनवरी को सेना दिवस पर थल सेना अध्यक्ष के प्रधानमंत्री को चैक सौंपने के समारोह की प्रेस विज्ञप्ति फोटो पीआईबी से जारी किया गया था। इस समारोह में रक्षा मंत्री मनोहर परिकर भी मौजूद थे। प्रेस विज्ञप्ति में लिखा था कि सैन्य कर्मियों का एक दिन का वेतन काटकर सेना ने प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए 100 करोड़ जुटाए हैं।
सैन्य कर्मियों के एक दिन के वेतन में कटौती कर राशि एकत्रित करने की बात आई थी सामने
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संवैधानिक उपचारों का अधिकार Right To Information Act
संवैधानिक उपचारों का अधिकार नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन या उल्लंघन के विरुद्ध सुरक्षा के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय में जाने की शक्ति देता है।[72] अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार के रूप में, अन्य मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए गारंटी प्रदान करता है, संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को इन अधिकारों के रक्षक के रूप में नामित किया गया है।[73] सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा प्रादेश (रिट, writ) जारी करने का अधिकार दिया गया है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 – जो एक मैलिक अधिकार नहीं है – मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न होने पर भी इन विशेषाधिकार प्रादेशों को जारी करने का अधिकार दिया गया है।[74] निजी संस्थाओं के खिलाफ भी मौलिक अधिकार को लागू करना तथा उल्लंघन के मामले में प्रभावित व्यक्ति को समुचित मुआवजे का आदेश जारी करना भी सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वप्रेरणा से या जनहित याचिका के आधार पर अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है।[72] अनुच्छेद 359 के प्रावधानों जबकि आपातकाल लागू हो, को छोड़कर यह अधिकार कभी भी निलंबित नहीं किया जा सकता।[73]