Allegations of Conflict of Interest and Abuse of Official Position in Indigenous Defence Procurement. For nearly 30 Years, concerns have repeatedly been raised regarding alleged conflicts of interest involving certain scientists and officials associated with (DRDO) defence research and development organizations. These concerns warrant an independent, transparent, and time-bound investigation in the larger interest of […]
डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) से छिन सकता है नियुक्ति का अधिकार
- वैज्ञानिकों की नियुक्तियों में धांधली की शिकायतों के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय कर रहा विचार
देहरादून: डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) से वैज्ञानिकों की नियुक्ति का अधिकार छिन सकता। पिछले कुछ समय में ऑर्गेनाइजेशन के रिक्रूटमेंट एसेसमेंट सेंटर की नियुक्तियों पर खड़े हुए सवाल को देखते हुए रक्षा मंत्रालय इस दिशा में तेजी से प्रयासरत है। बहुत संभव है कि यह अधिकार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को मिल सकता है। ऑप्टिक्स व इलेक्ट्रॉऑप्टिक्स सम्मेलन में शामिल होने दून आए डीआरडीओ प्रमुख ने इस बात के संकेत दिए। वर्ष 1984 तक डीआरडीओ में वैज्ञानिकों की नियुक्ति यूपीएससी के माध्यम से ही होती थी। मगर, इसके बाद यह जिम्मा ऑर्गेनाइजेशन के रिक्रूटमेंट एसेसमेंट सेंटर ने अपने हाथ ले लिया। सेंटर के माध्यम से निचले स्तर से लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिकों की नियुक्ति की जाती है और नियुक्ति प्रक्रिया में संगठन के वैज्ञानिक ही शामिल रहते हैं। पिछले कुछ समय में वैज्ञानिकों की नियुक्ति को लेकर धांधली के कई आरोप लगे। सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) ने मामले की जांच कर रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट दी। जिसमें कमीशन ने नियुक्ति प्रक्रिया पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनजमेंट, इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कालेज, एक्सएलआरआइ जमशेदपुर जैसे चोटी के संस्थानों से सलाह लेकर पूरा ब्योरा यूपीएससी के सम्मुख रखने का सुझाव दिया। डीआरडीओ के महानिदेशक अविनाश चन्दर ने कहा कि इस दिशा में बहुत जल्द यूपीएससी के चेयरमैन या अन्य अधिकारी डीआरडीओ की नियुक्ति प्रक्रिया का आंकलन करने पहुंचेंगे। इसके बाद रक्षा मंत्रालय तय करेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में किस तरह का फेरबदल किया जाना है।


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