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न्यूज 24 एक्सक्लूसिव: मोदी को शिकायत करना इस वैज्ञानिक को पड़ा महंगा on March 20, 2015 8:08 pm
संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (20 मार्च): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में पूरे देश से अपील करते हैं कि उन्हें सुझाव भेजिए। बताइए कि कैसे देश का भला किया जा सकता है। ऐसे में एक वैज्ञानिक सीधे प्रधानमंत्री दफ्तर को अपना सुझाव और शिकायत भेजते हैं। इस उम्मीद के साथ कि सरकार सुझाव के बारे में और जानकारी मांगेगी, शिकायत की जांच करेगी। लेकिन हुआ क्या। इसके आगे का पूरा सच आप जानेंगे तो कहीं आपका विश्वास सरकारी महकमों में सबसे ऊपर प्रधानमंत्री कार्यालय के काम करने के तरीके से ना उठ जाए।
28 सितंबर 2014 यही वो तारीख थी, जब वैज्ञानिक पशुपति राव ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर एक सुझाव शिकायत के साथ दर्ज कराई। जिसमें उन्होंने कोटा में नेशनल फ्यूल कॉम्प्लेक्स का सेंटर बनाने में हुई गड़बड़ियों का जिक्र किया। वैज्ञानिक पशुपतिराव ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बताया कि बाहर से एक्सपर्ट को अनुबंधित करने के नाम पर रिटायर्ड अफसरों को ही चुन लिया गया। 5 करोड़ का बजट बनाकर 16 लाख में काम पूरा किया गया। जबकि इतना पैसा खर्च करने की भी जरूरत नहीं थी क्योंकि सक्षम अफसरों के गैरवाजिब पदों पर बैठाकर संस्थान उनका इस्तेमाल नहीं कर रहा।
आप सोच रहे होंगे कि जब प्रधानमंत्री खुद देश के हित में जनता की भागीदारी चाहते हैं तो जरूर उन्होंने वैज्ञानिक पशुपतिराव के सुझाव और शिकायत पर जरूरी कदम उठाए होंगे। लेकिन इसके आगे क्या हुआ। आप जानकर चौंक जाएंगे। जो सुझाव और शिकायतें वैज्ञानिक पशुपतिराव ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थीं। उनकी जांच कराने की जगह PMO ने उन्हीं के पास भेज दिया, जिनकी शिकायत की गई थी। इसके बाद वैज्ञानिक के विभाग में हंगामा मच गया। शिकायत करने वाले पशुपति राव को ही विभाग ने चिट्ठी दे दी। जिसमें लिखा गया आपको जो काम मिला है। उस पर ध्यान दीजिए। आपने स्टाफ की शिकायत की है। आगे भी सवाल जवाब होंगे।
हालांकि पशुपति राव के बारे में जब उनके विभाग से न्यूज 24 ने सवाल पूछा तो दावा किया गया कि कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। लेकिन सच पशुपति राव को मिली ये वो चिट्ठी भी है, जो न्यूज 24 के पास है, जिसमें साफ साफ लिखा है कि आप अपने काम पर ध्यान दें। प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज को संभाल चुके राज्य मंत्री रहे नारायण सामी बताते हैं कि मोदी के ऑफिस की तरफ से बड़ी गलती हुई है जबकि मौजूदा मंत्री को तो पूरे मामले की खबर तक नहीं।
प्रधानमंत्री कार्यालय एक शिकायत को जांच करने की जगह उसी अफसर के पास भेज देता है जिसकी शिकायत की गई है और पीएमओ का कामकाज देखने वाले मंत्री कहते हैं कि जानकारी नहीं है। संभव है कि वो मामले को टालना चाहते हैं क्योंकि पशुपति राव के मामले में जो लापरवाही प्रधानमंत्री कार्यालय ने बरती है उसे लेकर सूचना के सिपाही प्रभु डॉड्रियाल ने पीएमओ में एक आरटीआई लगाई और इस आरटीआई का जवाब अब तक मोदी का कार्यालय तलाश ही रहा है। क्योंकि यही बताया गया है कि आपके सवाल का जवाब ढूंढने की प्रकिया जारी है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने विभाग से जुड़ी शिकायत करने वाले वैज्ञानिक पशुपति राव की पहचान जाहिर की तो अब तक उन्हें सिर्फ कुछ हिदायती चिट्ठी और आगे सवाल जवाब के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है। लेकिन पीएमओ से हुई इस चूक ने याद दिलाई है 12 साल पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से हुई बड़ी लापरवाही को। 12 साल पहले सत्येंद्र दुबे नाम के ईमानदार अफसर ने अपने विभाग में भ्रष्टाचार की सच्चाई प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई तो उसके बदले मौत दे दी गई।
सत्येंद्र दुबे नेशनल हाइवे अथॉरिटी में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर थे। उन्होंने अपने विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार का पूरा सच चिट्ठी में लिखकर प्रधानमंत्री कार्यालय के भेजा था। सत्येंद्र दुबे ने गुजारिश की थी कि उनका नाम जाहिर ना किया जाए। लेकिन तब पीएमओ ने सत्येंद्र दुबे के नाम के साथ उस चिट्ठी को कई विभागों को जारी किया था और फिर 27 नवंबर 2003 को सत्येंद्र दुबे की हत्या कर दी गई थी। 12 साल बाद पीएमओ ने फिर एक लापरवही की। गनीमत है कि इस बार सिर्फ शिकायतकर्ता को विभाग की तरफ से सवाल जवाब का ही सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ये एक चेतावनी की घंटी है। क्योंकि अब पीएमओ ने ऐसी लापरवाही बरती तो जनता का वो भरोसा चूर चूर हो जाएगा, जो प्रधानमंत्री देते हैं।
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बासमती धान के भाव 1500 काम हो गये जिससे किसानों को नुकसान पहुंचा वे भविष्य में बासमती धान की खेती बंद करेंगे पिछले साल से किमत काम होने से किसानों का मुनाफा कम हुआ गुड सोयाबीन कपास सभी का मूल काम हुआ है धान पर बोनस बंद करने से धान की किमत पिछले साल से कम हुई शासकीय सेवक की वेतन मे तेजी किसान की फसल फिसले साल से कम
बासमती धान के भाव में कमी आई है किंतु चावल के दामों में उतनी कमी नहीं आई है किसान के धान की कीमतें आधी हो गई है किसान के उपज का मंडी में वजन जिस तरह से होता है उसमें 4% तक अधिक अनाज तौला जाता है