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प्रतिरक्षा कर्मियों की तनी मुट्ठियां

  • डील कर्मचारी ओवर टाइम सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत
  • लंबित मांगों के समाधान के लिए मुख्य द्वार पर दिया धरना
  • निदेशक द्वारा वार्ता का आश्वासन दिए जाने पर आंदोलन स्थगित

जागरण संवाददाता, देहरादून: रक्षा अनुसंधान कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रतिरक्षा कर्मियों ने बुधवार को डील के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी ओवर टाइम सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। बहरहाल निदेशक द्वारा 10 अप्रैल को वार्ता का आश्वासन देने के बाद उन्होंने आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है।1डील कर्मियों ने लगातार तीन दिन द्वार सभा व धरना-प्रदर्शन की घोषणा की थी। बुधवार सुबह कर्मचारियों ने मुख्य द्वार पर धरना देकर प्रदर्शन किया। संघ अध्यक्ष अनिल कुमार यादव ने कहा कि विभागीय एलडीसी की परीक्षा 2011 के बाद से बंद कर दी गयी है। जिससे कर्मचारियों को प्रमोशन का मौका नहीं मिल रहा है इसलिए यह परीक्षा दोबारा शुरू की जानी चाहिए। साथ ही डीआरटीसी एवं अन्य वर्ग के कर्मचारियों को पेड ओवर टाइम दिया जाना चाहिए। महामंत्री ललतेश कुमार ने कहा कि एसीपी का निर्धारण नियमों के मुताबिक किया जाना चाहिए। हालिया व्यवस्था से कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूल बस की सुविधा सभी कर्मचारियों को मिलनी चाहिए। जबकि इसका फायदा केवल अधिकारियों को मिल रहा है। इसके अलावा एएलएस का विभागीय स्थानांतरण भी तत्काल रद किया जाए।

डील निदेशक आरसी अग्रवाल ने कर्मचारियों को 10 अप्रैल को सभी मांगों पर वार्ता का न्योता दिया है। इसके बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है। धरना देने वालों में संघ उपाध्यक्ष वीबी शर्मा, पीएस नेगी, मनोज पाल, विपिन चंद डंडरियाल, वीरेंद्र रावत, संतोष कुमार आदि मौजूद रहे।

Dainik Jagran 9 april 2015
Dainik Jagran 9 april 2015

hidustan times 9 april 2015

 

Amar Ujala 9 april

सेवा विस्तार में पीएम की सहमति जरूरी

सेवानिवृत होने वाले अधिकारियों को बिना अनुमति लिए मनमर्जी से सेवा विस्तार देने पर रोक लगा दी है। पिछले शुक्रवार को जारी आफिस मेमोरेंडम में सेवा विस्तार देने के पहले प्रधानमंत्री की अगुआई वाली नियुक्ति संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (एसीसी) की मुहर लेना अनिवार्य कर दिया है। इसके पहले प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों को संप्रग सरकार के मंत्रियों के निजी स्टाफ के रूप में काम कर चुके अधिकारियों को निजी सचिव और ओएसडी रखने पर रोक लगा दी थी।

कार्मिक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सेवानिवृत होने वाले अधिकारियों को बिना एसीसी की अनुमति के सेवा विस्तार देने की परंपरा सी बन गई थी। सेवा विस्तार देने के बाद उसे एसीसी के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता था। यही नहीं, कई बार एसीसी के पास अंतिम समय में सेवा विस्तार के लिए फाइल भेजी जाती थी और समय पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में अस्थायी तौर पर सेवा विस्तार दे दिया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि बिना एसीसी से पूर्व मंजूरी लिए किसी भी सेवानिवृत अधिकारी को सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालय और विभागों को सेवा विस्तार की अनुमति की फाइल एसीसी के पास संबंधित अधिकारी के सेवानिवृत होने से दो महीने पहले भेजना होगा। ताकि एसीसी में उस पर विस्तार से विचार किया जा सके।

कार्मिक मंत्रालय के अनुसार यदि मंत्रालय किसी अधिकारी एसीसी की अनुमति मिलने के पहले दिया गया सेवा विस्तार अवैध होगा और संबंधित अधिकारी को सेवानिवृत माना जाएगा। बता दें कि एससीसी में प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह सदस्य हैं। पहले संबंधित मंत्रालय के मंत्रियों को भी एसीसी में शामिल किया गया था, लेकिन मोदी सरकार में एसीसी में उन्हें जगह नहीं मिली है।

Dainik Jagran 3 October 2014
Dainik Jagran 3 October 2014