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डी आर डी ओ फ़ेलोशिप से सर्विस एक्सटेंशन में की गयी पी एम ओ की सख्ती को डी आर डी ओ ने बाबा जी का ठुलु दिखा दिया।

सेवामें                                                    दिनाक 19 सितम्बर 2014
माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी                                                                       
प्रधानमंत्री
कक्ष संख्या  152पीएमओ
साउथ ब्लाक  नईदिल्ली -110011

विषय : डी आर डी ओ  द्वारा   सर्विस एक्सटेंशन  पर  सख्ती  होने  पर  डी आर डी ओ  फ़ेलोशिप  का  नया दांव

श्रीमान, डीआर डी द्वारा  सर्विस एक्सटेंशन की यू पी ए सरकार के माध्यम एक प्रथा ही बना डाली थी।  सर्विस  एक्सटेंशन सिर्फ  उन सीनियर अधिकारीयों को मिलता जो की  भ्रष्टाचार में लिप्त होते थे या भ्रष्टाचार में सहायक की भूमिका निभाने के लिए हामी भरते थे।  डी आर डी ओ द्वारा  सर्विस एक्सटेंशन की संस्तुति का केवल एकमात्र यही एक योग्यता मापदंड था। इसके लिए विकिलीक्स के एक केबल में यू पी ए सरकार द्वारा श्री प्रणब मुखर्जी रक्षा मंत्रालय से हटाने का कारण उनका पार्टी फण्ड के लिए अपने मत्रांलय से पैसा एकत्र न करने पर श्रीमती सोनिया गांधी व् तत्कालीन पी एम श्री मनमोहन सिंह ने उन्हें रक्षा मंत्री के पद से हटा कर श्री एंटोनी को रक्षा मंत्रालय दे दिया गया। उसका परिणाम पूरा देश अगस्ता वेस्टलैंड से लेकर डीआर डी के बर्ह्मोस से लेकर अग्नि 1,2,3,4,5 ………….. के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार के खुले खेल को देख रहा है।

https://www.wikileaks.org/plusd/cables/06NEWDELHI7358_a.html

C O N F I D E N T I A L SECTION 01 OF 02 NEW DELHI 007358 DEPT FOR SCA/INS, DRL, INR/B E.O. 12958: DECL: 08/31/2016 TAGS: PGOV, PREL, PINR, IN SUBJECT: A.K. ANTONY NAMED MINISTER OF DEFENSE REF: NEW DELHI 7338 Classified By: Pol Couns Ted Osius for reasons 1.4 (B,D) 2. (C) Our sources tell us that Congress Party President Sonia Gandhi and PM Singh needed to get Pranab Mukherjee out of his post as Minister of Defense because he was not sufficiently zealous in raising funds for the party. Mukherjee finally accepted the move after receiving reassurances that he would remain in charge of the many Ministerial Committees that help him maintain his domestic power base. The shift of Mukherjee to External Affairs left open the post of Minister of Defense, which A.K. Antony accepted. Antony’s opponents question his ability to thrive in this high level, high profile position. His reputation for integrity is expected to slow down pending deals, as Antony learns the ropes and carefully examines all contracts, including pending arms deals with the U.S. Antony will bring much needed probity to defense acquisitions just before a large number of big deals are about to be considered.

परन्तु आपने आते ही इस प्रथा का अंत करने करने के निर्देश दिए तथा सर्विस एक्सटेंशन के योग्यता मापदंड के अनुसार ही दिया जाय इसका कड़ा निर्देश दिया पुरानी समिति भंग कर दी। किन्तु आप भूल गए कि इन भ्रष्ट डी आर डी ओ अधिकारियों / तथाकित वैज्ञानिको के मुँह में  सर्विस एक्सटेंशन का खून लग चूका है।  इसके लिए डी आर डी ओ  ने एक्सटेंशन पर नई रिसर्च की है, उसको नया नाम डी आर डी ओ फ़ेलोशिप का दिया  गया है।

आप के नाक के नीचे बैठे अधिकारी अभी पूरी तरह से आपकी भ्रष्टाचार रहित कार्यप्रणाली  को ठीक  से समझ नहीं पाये है और इन तथाकथित  वैज्ञानिको के जाल में फंस कर नियम विरुद्ध संस्तुति प्रदान कर रहे है। इसका  ताजा तरीन उदहारण है डॉ ए के गुप्ता और डॉ सुधाकर कोसितम्बर माह 2014 से नयी नयी पैदा हुई डी आर डी ओ फ़ेलोशिप से नवाजा गया है। डॉ ए के गुप्ता जोकि दो साल के एक्सटेंशन में आई आर डी ई, डी आर डी ओ, देहरादून में निदेशक के पद अभी 31 अगस्त 2014 को पदमुक्त हुए है।यह उनकी डी आर डी ओ के उच्च अधिकारियो पर उनकी पक्कड़ का असर दिखता है।

डी आर डी ओ फ़ेलोशिप आपके द्वारा की गयी एक्सटेंशन में की गयी सख्ती का तोड़ है।

डी आर डी ओ फ़ेलोशिप को 12 सितम्बर 2014 को  वित्त मंत्रालय  द्वारा संस्तुति प्रदान की गयी और अंडर सेक्रेटरी रक्षा मंत्रालय 16 सितम्बर 2014 को डॉ ए के गुप्ता को डी आर डी ओ फ़ेलोशिप (63000 रूपए प्रति माह और वर्ष में तीन लाख रूपए टी ऐ / डी ऐ)  देते  हुए डील, डी आर डी ओ, देहरादून में अगले तीन वर्षो नियुक्त कर दिया।

आश्चर्य का विषय यह है कि डॉ ए के गुप्ता की नियुक्ति जिस कार्य के लिए की गयी है “Blue Green Laser under water communication especially for submarine communication applications”

इस विषय में  डॉ ए के गुप्ता कभी भी कुछ किसी भी तरह का कार्य या शोध या कभी कोई प्रेजेंटेशन तक नहीं किया अथार्थ दूर दूर तक विषय से डॉ ए के गुप्ता सम्बन्ध नहीं रहा है।

अभी हमारी पनडुब्बियों को संचार के लिए समुद्र की सतह पर आना पड़ता है। सूर्य का प्रकाश ही समुद्र की तहलटी तक पहुँचता है और इसी से ब्लू ग्रीन लेज़र तकनीक का सहारा लेकर पनडुब्बी से समुद्र भीतर संचार संभव हो पाया है।

यह तकनीक  विश्व में सिर्फ अमेरिका व् चीन के पास उपलब्ध है। अमेरिका ने अंटालिक में बहुत से प्रयोगो के बाद सफलता पायी व् चीन के पास उपग्रह उपग्रह से सीधा समुद्र में पानी के अंदर स्थित पनडुब्बी संचार करने की तकनीकी उपलब्ध है।

आशा है कि आप इन भ्रष्ट डी आर डी ओ अधिकारियों के उलटे सीधे निरुद्देश्य, लक्ष्यहीन, अर्थहीन व् अव्यवहारिक परियोजनाओं और प्रस्तावों को पुनमूल्यांकन के लिए अपने अधिकारिओं को आदेश देंगे जिससे आपकी भ्रष्टाचार मुक्त गवर्नेंस के मिशन को पूर्ण करने की तरफ एक कदम बढ़ेगा ।

धन्यवाद

प्रभु डंडरियाल
21-सुंदरवाला, रायपुर, देहरादून
फ़ोन  0135- 2787750, मोबाइल – 9411114879,
e-मेल  id prabhudoon@gmail.com  वेबसाइट  www.corruptionindrdo.com

डीआरडीओ प्रमुख ने उठाए रक्षा बजट पर सवाल

  • महानिदेशक ने रक्षा बजट में रिसर्च एंड डेवलपमेंट से अधिक आयात को तवज्जो देने पर जताई चिंता
  • हथियारों के सेंसर देश में ही बनाने की योजना

देहरादून: तमाम रक्षा उपकरणों में सेंसर प्रणाली उसकी सटीकता को कई गुना बढ़ा देती है। अब तक सेंसर के लिए भारत फ्रांस व इजराइल समेत विभिन्न देशों पर निर्भर है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए रक्षा मंत्रलय ने देश में ही सेंसर तैयार करने का निर्णय लिया है। पत्रकारों से रूबरू डीआरडीओ के महानिदेशक अविनाश चंदर ने बताया कि रक्षा उपकरणों में अपने ही देश में निर्मित सेंसर लगाने के लिए करीब 700 करोड़ रुपये की योजना पर काम चल रहा है।

जागरण संवाददाता, देहरादून: डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के महानिदेशक व रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार अविनाश चन्दर ने रक्षा बजट के विभाजन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा बजट में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के मामले में भारत फिसड्डी है। कुल रक्षा बजट का महज 5.5 फीसद हिस्सा ही आर-एंड-डी पर खर्च किया जा रहा है, जबकि 25 फीसद से अधिक बजट का प्रावधान विदेशों से रक्षा खरीद के लिए किया जा रहा है। इसका प्रतिकूल असर देश के रक्षा अनुसंधान पर पड़ रहा है। उन्होंने इंडियन सोसाइटी ऑफ इंडिया के स्वर्ण जयंती समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही। बुधवार को राजधानी देहरादून स्थित यंत्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान (आइआरडीई) में ऑप्टिक्स एंड इलेक्ट्रोऑप्टिक्स विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए डीआरडीओ प्रमुख ने स्वीकार किया कि अमेरिका, इजराइल, रूस, फ्रांस व चीन के मुकाबले रक्षा अनुसंधान में भारत को अभी लंबा सफर तय करना है। यह तभी हो पाएगा जब रिसर्च एंड डेवलपमेंट की तरफ विशेष ध्यान दिया जाएगा। चिंता की बात यह है कि इस मोर्चे पर देश बेहद पीछे चल रहा है। अपने देश में रक्षा बजट का महज 5.5 फीसद भाग आर-एंड-डी पर खर्च किया जाता है, जबकि चीन में यह दर 20 फीसद है। इसी अनदेखी के कारण रक्षा हथियारों की खरीद के लिए भारत को दूसरे देशों पर निर्भर होना पड़ता है। यदि हथियारों की खरीद के लिए रक्षा बजट के 25 फीसद हिस्से का बड़ा हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर लगाया जाए तो विदेशी सहायता की जरूरत नहीं पड़ेगी। सम्मेलन में डीआरडीओ के महानिदेशक (ईसीएस) एसएस सुंदरम, व ऑप्टिकल सोसाइटी के अध्यक्ष बीपी पाल ने माइक्रो ऑप्टिक्स, नैनो ऑप्टिक्स आदि पर विस्तृत व्याख्यान दिया। साथ ही कई रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर सोसाइटी की स्मारिका का विमोचन व ऑप्टिक्स व इलेक्ट्रॉऑप्टिक्स प्रदर्शनी, ऑप्टिकल व फैब्रिकेशन भवन का शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम में आइआरडीई के निदेशक डॉ. एके गुप्ता, डॉ. एसएस नेगी, एलएन हाजरा, अनुराग शर्मा, अमिताभ घोष, अभय कुमार उपस्थित थे।

DRDO chief also raised questions on the defense budget Instruments Research and Development Establishment, IRDE, Dehradun organized the International Conference on Optics and Electro-optics Inaugurating DRDO chief admitted that the U.S., Israel, Russia, France and China's defense research still a long way to India have to.
DRDO chief also raised questions on the defense budget
Instruments Research and Development Establishment, (IRDE), Dehradun organized the International Conference on Optics and Electro-optics Inaugurating DRDO chief admitted that the U.S., Israel, Russia, France and China’s defense research still a long way to India have to.