- आइआरडीई के एक अफसर ने भेजा शिकायतों का पुलिंदा
- अब निदेशक ने मामले की जांच को कमेटी गठित की
28 जून 2011 को आइआरडीई से सेंट्रल सॉल्वेज डिपो, नई दिल्ली के लिए एल्युमिनियम लेकर पांच ट्रक चले थे। जिसमें से एक ट्रक का करीब 500 किलो एल्युमिनियम गायब मिला था। जांच में भी इसकी पुष्टि हुई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
देहरादून की एक फर्म से मानकों को ताक पर रखकर 10 लाख रुपये के फर्नीचर की खरीद। 18 सफाई और रखरखाव के नाम पर कार्मिकों का बेहिसाब ओवरटाइम।
खाली होने के बावजूद तीन साल तक निदेशक आवास अन्य पात्र अधिकारी को आवंटित नहीं किया गया।
शिकायत करना पड़ा महंगा
मुश्किल : पीएमओ को भेजी चिट्ठी में इन मुद्दों का है जिक्र
सुमन सेमवाल, देहरादून डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के देहरादून स्थित यंत्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान (आइआरडीई) के एक अफसर को विभाग के गड़बड़झाले की शिकायत पीएमओ से करना महंगा पड़ गया। विभाग ने शिकायत पर कार्रवाई की बजाए उन पर ही अनुशासन की तलवार लटका दी। हालांकि, इसके बाद हुए पत्रचार को देखते हुए संस्थान के निदेशक ने पूरे मामले की जांच के लिए अब कमेटी गठित कर दी गई। 1किस्सा कुछ इस तरह है, आइआरडीई के टेक्निकल स्टाफ ऑफिसर वीके गोयल ने फरवरी माह में पीएमओ को पत्र लिखकर विभागीय अनियमितताओं की शिकायत की थी। बताया गया कि पीएमओ ने उनके इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए संस्थान के निदेशक को कार्रवाई करने को कहा। लेकिन, हुआ इसके उलट। संस्थान के स्तर पर इस अधिकारी को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी जारी कर दी गई। इस पर शिकायतकर्ता अधिकारी ने ऐतराज जताया तो संस्थान के आला अधिकारियों ने पीएमओ से आई चिठ्ठी पर संज्ञान लिया। अब इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए 18 मार्च को वरिष्ठ वैज्ञानिक एके सहाय की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया गया है।
अनियमितताएं पूर्व की हैं। जांच कमेटी बैठा दी गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रक्षा संस्थान में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वैसे कार्मिकों को इस तरह पीएमो तक नहीं जाना चाहिए।1डॉ. एसएस नेगी, निदेशक (आइआरडीई)














